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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਰੂਪ ਰੇਖ ਜਾ ਕਰਨ ਕਛੁ ਅਰੁ ਕਛੁ ਨਹਿਨਾਕਾਰ ॥ ਸਿਲਾ ਰੂਪ ਬਰਤਤ ਜਗਤ ਸੋ ਬਊਧ ਅਵਤਾਰ ॥੩॥

Roop Rekha Jaa Karana Kachhu Aru Kachhu Nahinaakaar ॥ Silaa Roop Baratata Jagata So Baoodha Avataar ॥3॥

रूप रेख जा करन कछु अरु कछु नहिनाकार ॥ सिला रूप बरतत जगत सो बऊध अवतार ॥३॥

Neither he is beautiful nor he does any work; he considers the whole world like stone and calls himself the Buddha incarnation.3.

158781 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧


ਇਤਿ ਸ੍ਰੀ ਬਚਿਤ੍ਰ ਨਾਟਕੇ ਗ੍ਰੰਥੇ ਬਉਧ ਅਵਤਾਰ ਸਤੁ ਸੁਭਮ ਸਤੁ ॥੨੩॥

Eiti Sree Bachitara Naattake Garaanthe Baudha Avataar Satu Subhama Satu ॥23॥

इति स्री बचित्र नाटके ग्रंथे बउध अवतार सतु सुभम सतु ॥२३॥

Here ends the description of Buddha Incarnation in Bachittar Natak.23.

158792 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੨


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

158803 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੩


ਅਥ ਨਿਹਕਲੰਕੀ ਚੌਬੀਸਵੌ ਅਵਤਾਰ ਕਥਨੰ ॥

Ath Nihakalaankee Choubeesavou Avataar Kathnaan ॥

अथ निहकलंकी चौबीसवौ अवतार कथनं ॥

Now begins the description of Nihkalanki, the twenty-fourth incarnation

158814 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੪


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPAI

158825 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੫


ਅਬ ਮੈ ਮਹਾ ਸੁੱਧ ਮਤਿ ਕਰ ਕੈ ॥ ਕਹੋ ਕਥਾ ਚਿਤੁ ਲਾਇ ਬਿਚਰ ਕੈ ॥ਚਉਬੀਸਵੌ ਕਲਕੀ ਅਵਤਾਰਾ ॥ ਤਾ ਕਰ ਕਹੋ ਪ੍ਰਸੰਗ ਸੁਧਾਰਾ ॥੧॥

Aba Mai Mahaa Su`dha Mat(i) Kara Kai ॥ Kaho Katha Chitu Laaei Bichara Kai ॥chaubeesavou Kalakee Avataara ॥ Taa Kara Kaho Parasang Sudhaara ॥1॥

अब मै महा सुध मति कर कै ॥ कहो कथा चितु लाइ बिचर कै ॥चउबीसवौ कलकी अवतारा ॥ ता कर कहो प्रसंग सुधारा ॥१॥

Now, I purging my intellect, relate the story with full concentration of Kalki, the twenty –fourth incarnation and describe his episode, while emending it.1.

158836 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੬


ਭਾਰਾਕ੍ਰਿਤ ਹੋਤ ਜਬ ਧਰਣੀ ॥ ਪਾਪ ਗ੍ਰਸਤ ਕਛੂ ਜਾਤ ਨ ਬਰਣੀ ॥ ਭਾਂਤ ਭਾਂਤ ਤਨ ਹੋ ਉਤਪਾਤਾ ॥ ਪੁਤ੍ਰਹ ਸੇਜ ਸੋਵਤ ਲੈ ਮਾਤਾ ॥੨॥

Bhaarakarita Hota Jaba Dharanee ॥ Paapa Garasat Kachhoo Jaata Na Baranee ॥ Bhaata Bhaata Tana Ho Autapaataa ॥ Putaraha Seja Sovata Lai Maataa ॥2॥

भाराक्रित होत जब धरणी ॥ पाप ग्रसत कछू जात न बरणी ॥ भांत भांत तन हो उतपाता ॥ पुत्रह सेज सोवत लै माता ॥२॥

When the earth is pressed downward by the weight of sin and her suffering becomes indescribeable; several types of crimes are committed and the mother sleeps for the sexual enjoyment with her son in the same bed.2.

158847 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੭


ਸੁਤਾ ਪਿਤਾ ਤਨ ਰਮਤ ਨਿਸ਼ੰਕਾ ॥ ਭਗਨੀ ਭਰਤ ਭ੍ਰਾਤ ਕਹ ਅੰਕਾ ॥ ਭ੍ਰਾਤ ਬਹਿਨ ਤਨ ਕਰਤ ਬਿਹਾਰਾ ॥ ਇਸਤ੍ਰੀ ਤਜੀ ਸਕਲ ਸੰਸਾਰਾ ॥੩॥

Sutaa Pitaa Tana Ramta Nishaankaa ॥ Bhaganee Bharata Bharaata Kaha Aankaa ॥ Bharaata Bahina Tana Karata Bihaara ॥ Eisatree Tajee Sakala Saansaara ॥3॥

सुता पिता तन रमत निशंका ॥ भगनी भरत भ्रात कह अंका ॥ भ्रात बहिन तन करत बिहारा ॥ इसत्री तजी सकल संसारा ॥३॥

The daughter unhesitatingly enjoys with her father and the sister embraces her brother; the brighter enjoys the body of the sister and the whole world relinquishes the wife/3.

158858 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੮


ਸ਼ੰਕਰ ਬਰਨ ਪ੍ਰਜਾ ਸਭ ਹੋਈ ॥ ਏਕ ਗਯਾਤ ਕੋ ਰਹਾ ਨ ਕੋਈ ॥ ਅਤਿ ਬਿਭਚਾਰ ਫਸੀ ਬਰ ਨਾਰੀ ॥ ਧਰਮ ਰੀਤ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤ ਬਿਸਾਰੀ ॥੪॥

Shaankara Barana Parajaa Sabha Hoeala ॥ Eeka Gayaata Ko Rahaa Na Koeala ॥ At(i) Bibhachaar Phasee Bara Naaree ॥ Dharam Reeta Kee Pareeta Bisaaree ॥4॥

शंकर बरन प्रजा सभ होई ॥ एक गयात को रहा न कोई ॥ अति बिभचार फसी बर नारी ॥ धरम रीत की प्रीत बिसारी ॥४॥

The whole subjects become hybrid and no one knows the other; the beautiful women are engrossed in adultery and forget the real love and the traditions of religion.4.

158869 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੯


ਘਰ ਘਰ ਝੂਠ ਅਮੱਸਿਆ ਭਈ ॥ ਸਾਚ ਕਲਾ ਸਸ ਕੀ ਦੁਰ ਗਈ ॥ ਜਹ ਤਹ ਹੋਨ ਲਗੇ ਉਤਪਾਤਾ ॥ ਭੋਗਤ ਪੂਤ ਸੇਜ ਚੜਿ ਮਾਤਾ ॥੫॥

Ghara Ghara Jhoottha Ama`siaa Bhaeala ॥ Saacha Kalaa Sasa Kee Dura Gaeala ॥ Jaha Taha Hona Lage Autapaataa ॥ Bhogata Poota Seja Charhi Maataa ॥5॥

घर घर झूठ अमसिआ भई ॥ साच कला सस की दुर गई ॥ जह तह होन लगे उतपाता ॥ भोगत पूत सेज चड़ि माता ॥५॥

In every home, in the dark night of falsehood, the phases of the moon of truth are hidden; the crimes are committed everywhere and the son comes to the bed of his mother and enjoys her.5.

1588710 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧੦


ਢੂਢਤ ਸਾਚ ਨ ਕਤਹੂੰ ਪਾਯਾ ॥ ਝੂਠ ਹੀ ਸੰਗ ਸਭੋ ਚਿਤ ਲਾਯਾ ॥ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਗ੍ਰਹਿ ਗ੍ਰਹਿ ਮਤ ਹੋਈ ॥ ਸ਼ਾਸਤ੍ਰ ਸਿਮ੍ਰਿਤਿ ਛੁਐ ਨ ਕੋਈ ॥੬॥

Dhoodhata Saacha Na Katahooan Paayaa ॥ Jhoottha Hee Sang Sabho Chita Laayaa ॥ Bhianna Bhianna Garahi Garahi Mata Hoeala ॥ Shaastra Simariti Chhuaai Na Koeala ॥6॥

ढूढत साच न कतहूं पाया ॥ झूठ ही संग सभो चित लाया ॥ भिंन भिंन ग्रहि ग्रहि मत होई ॥ शासत्र सिम्रिति छुऐ न कोई ॥६॥

The truth is not seen even on search and the mind of everyone is absorbed in falsehood; in every home, there Shastras and Smritis.6.

1588811 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧੧


ਹਿੰਦਵ ਕੋਈ ਨ ਤੁਰਕਾ ਰਹਿ ਹੈ ॥ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਘਰ ਘਰ ਮਤਿ ਗਹਿ ਹੈ ॥ਏਕ ਏਕ ਕੇ ਪੰਥ ਨ ਚਲ ਹੈ ॥ ਏਕ ਏਕ ਕੀ ਬਾਤ ਉਥਲ ਹੈ ॥੭॥

Hiandava Koeala Na Turakaa Rahi Hai ॥ Bhianna Bhianna Ghara Ghara Mat(i) Gahi Hai ॥eeka Eeka Ke Paantha Na Chala Hai ॥ Eeka Eeka Kee Baata Authala Hai ॥7॥

हिंदव कोई न तुरका रहि है ॥ भिंन भिंन घर घर मति गहि है ॥एक एक के पंथ न चल है ॥ एक एक की बात उथल है ॥७॥

There will neither be a true Hindu nor a true Muslim; there will be diverse in every home; on one will follow the established religious paths and will oppose the saying of each other.7.

1588912 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧੨


ਭਾਰਾਕ੍ਰਿਤ ਧਰਾ ਸਭ ਹੁਇ ਹੈ ॥ ਧਰਮ ਕਰਮ ਪਰ ਚਲੈ ਨ ਕੁਇ ਹੈ ॥ ਘਰ ਘਰ ਅਉਰ ਅਉਰ ਮਤ ਹੋਈ ॥ ਏਕ ਧਰਮ ਪਰ ਚਲੈ ਨ ਕੋਈ ॥੮॥

Bhaarakarita Dharaa Sabha Huei Hai ॥ Dharam Karam Para Chalai Na Kuei Hai ॥ Ghara Ghara Aaura Aaura Mata Hoeala ॥ Eeka Dharam Para Chalai Na Koeala ॥8॥

भाराक्रित धरा सभ हुइ है ॥ धरम करम पर चलै न कुइ है ॥ घर घर अउर अउर मत होई ॥ एक धरम पर चलै न कोई ॥८॥

The earth will be pressed underneath with weight and no one will follow the follow the religious tenets; there will be different beliefs in every home and no one will follow only one religion.8.

1589013 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧੩


ਦੋਹਰਾ ॥

Doharaa ॥

दोहरा ॥

DOHRA

1589114 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੩੫ ਪੰ. ੧੪


       


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