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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਅਬ ਹੀ ਰਣਿ ਏਕ ਕੀ ਏਕ ਕਰੈ ॥ ਬਿਨ ਏਕ ਕੀਏ ਰਣਿ ਤੇ ਨ ਟਰੈ ॥ਬਹੁ ਸਾਲ ਸਿਲਾ ਤਲ ਬ੍ਰਿਛ ਛੁਟੇ ॥ ਦੁਹੂ ਓਰ ਜਬੈ ਰਣ ਬੀਰ ਜੁਟੇ ॥੧੧੬॥

Aba Hee Rani Eeka Kee Eeka Karai ॥ Bina Eeka Keeee Rani Te Na Ttarai ॥bahu Saal Silaa Tala Barichha Chhutte ॥ Duhoo Aoara Jabai Rana Beera Jutte ॥116॥

अब ही रणि एक की एक करै ॥ बिन एक कीए रणि ते न टरै ॥बहु साल सिला तल ब्रिछ छुटे ॥ दुहू ओर जबै रण बीर जुटे ॥११६॥

Both of them had the same objective and did not want to leave the battle without killing the opponent; both the warriors showered trees and stones etc. from both the sides.116.

169561 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧


ਕੁਪ ਕੈ ਲਵ ਪਾਨ ਤ੍ਰਿਸੂਲ ਲਯੋ ॥ ਸਿਰ ਧਾਤਯਮਾਨ ਦੁਖੰਡ ਕਯੋ ॥ ਬਹੁ ਜੂਥ ਪਜੂਥਨ ਸੈਨ ਭਜੀ ॥ ਨ ਉਚਾਇ ਸਕੈ ਸਿਰ ਐਸ ਲਜੀ ॥੧੧੭॥

Kupa Kai Lava Paana Tarisoola Layo ॥ Sira Dhaatayamaana Dukhaanda Kayo ॥ Bahu Jootha Pajoothana Saina Bhajee ॥ Na Auchaaei Sakai Sira Aaisa Lajee ॥117॥

कुप कै लव पान त्रिसूल लयो ॥ सिर धातयमान दुखंड कयो ॥ बहु जूथ पजूथन सैन भजी ॥ न उचाइ सकै सिर ऐस लजी ॥११७॥

Lavanasura held his trident in his hand in anger and chopped the head of Mandhata into two parts; the army of Mandhata ran away, being grouped together and got so much ashmed that it could not carry the head of the king.117.

169572 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੨


ਘਨਿ ਜੈਸ ਭਜੇ ਘਨ ਘਾਇਲ ਹੁਐ ॥ ਬਰਖਾ ਜਿਮ ਸ੍ਰੋਣਤ ਧਾਰ ਚੁਐ ॥ ਸੁਭ ਮਾਨ ਮਹੀਪਤ ਛੇਤ੍ਰਹ ਦੈ ॥ ਸਭ ਹੀ ਦਲ ਭਾਗ ਚਲਾ ਜੀਅ ਲੈ ॥੧੧੮॥

Ghani Jaisa Bhaje Ghana Ghaaeila Huaai ॥ Barakhaa Jima Saronata Dhaar Chuaai ॥ Subha Maana Maheepata Chhetaraha Dai ॥ Sabha Hee Dala Bhaag Chalaa Jeea Lai ॥118॥

घनि जैस भजे घन घाइल हुऐ ॥ बरखा जिम स्रोणत धार चुऐ ॥ सुभ मान महीपत छेत्रह दै ॥ सभ ही दल भाग चला जीअ लै ॥११८॥

The army, getting wounded, flew away like clouds and the blood flowed as if it was raining; abandoning the dead king in the battlefield, the whole army of the king saved itself by fleeing away.118.

169583 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੩


ਇਕ ਘੂਮਤ ਘਾਇਲ ਸੀਸ ਫੁਟੇ ॥ ਇਕ ਸ੍ਰੋਣ ਚੁਚਾਵਤ ਕੇਸ ਛੁਟੇ ॥ ਰਣ ਮਾਰ ਕੈ ਮਾਨਿ ਤ੍ਰਿਸੂਲ ਲੀਏ ॥ ਭਟ ਭਾਂਤਹਿ ਭਾਂਤ ਭਜਾਇ ਦੀਏ ॥੧੧੯॥

Eika Ghoomata Ghaaeila Seesa Phutte ॥ Eika Sarona Chuchaavta Kesa Chhutte ॥ Rana Maar Kai Maani Tarisoola Leeee ॥ Bhatta Bhaatahi Bhaata Bhajaaei Deeee ॥119॥

इक घूमत घाइल सीस फुटे ॥ इक स्रोण चुचावत केस छुटे ॥ रण मार कै मानि त्रिसूल लीए ॥ भट भांतहि भांत भजाइ दीए ॥११९॥

Those who returned, their heads cracked, their hair were loosened and being wounded, the blood flowed form their heads; in this way, Lavanasura won the battle on the strength of his trident and caused the warriors of many kinds to run away.119.

169594 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੪


ਇਤਿ ਮਾਨਧਾਤਾ ਬਧਹਿ ॥

Eiti Maanadhaataa Badhahi ॥

इति मानधाता बधहि ॥

End of the killing of Mandhata.

169605 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੫


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

169616 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੬


ਅਥ ਦਲੀਪ ਕੋ ਰਾਜ ਕਥਨੰ ॥

Ath Daleepa Ko Raaja Kathnaan ॥

अथ दलीप को राज कथनं ॥

Now begins the description of the rule of Dileep

169627 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੭


ਤੋਟਕ ਛੰਦ ॥

Tottaka Chhand ॥

तोटक छंद ॥

TOTAK STANZA

169638 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੮


ਰਣ ਮੋ ਜਨ ਮਾਨ ਮਹੀਪ ਹਏ ॥ ਤਬ ਆਨ ਦਿਲੀਪ ਦਿਲੀਸ ਭਏ ॥ ਬਹੁ ਭਾਂਤਨ ਦਾਨਵ ਦੀਹ ਦਲੇ ॥ ਸਭ ਠੌਰ ਸਭੌ ਉਠ ਧਰਮ ਪਰੇ ॥੧੨੦॥

Rana Mo Jana Maana Maheepa Haee ॥ Taba Aana Dileepa Dileesa Bhaee ॥ Bahu Bhaatana Daanava Deeha Dale ॥ Sabha Tthoura Sabhou Auttha Dharam Pare ॥120॥

रण मो जन मान महीप हए ॥ तब आन दिलीप दिलीस भए ॥ बहु भांतन दानव दीह दले ॥ सभ ठौर सभौ उठ धरम परे ॥१२०॥

When Mandhata was killed in the war, then Dileep became the king of Delhi; he destroyed the demons in various ways and propagated religion at all places.120.

169649 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੯


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPI

1696510 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧੦


ਜਬ ਨ੍ਰਿਪ ਹਨਾ ਮਾਨਧਾਤਾ ਬਰ ॥ ਸ਼ਿਵ ਤ੍ਰਿਸੂਲ ਕਰ ਧਰਿ ਲਵਨਾਸੁਰ ॥ ਭਯੋ ਦਲੀਪ ਜਗਤ ਕੋ ਰਾਜਾ ॥ ਭਾਂਤ ਭਾਂਤ ਜਿਹ ਰਾਜ ਬਿਰਾਜਾ ॥੧੨੧॥

Jaba Naripa Hanaa Maanadhaataa Bara ॥ Shiva Tarisoola Kara Dhari Lavanaasura ॥ Bhayo Daleepa Jagata Ko Raajaa ॥ Bhaata Bhaata Jiha Raaja Biraajaa ॥121॥

जब न्रिप हना मानधाता बर ॥ शिव त्रिसूल कर धरि लवनासुर ॥ भयो दलीप जगत को राजा ॥ भांत भांत जिह राज बिराजा ॥१२१॥

When taking the trident of Shiva, Lavanasura killed the superb king mandhata, then the king Dileep came to the throne; he had various types of royal luxuries.121.

1696611 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧੧


ਮਹਾਰਥੀ ਅਰੁ ਮਹਾ ਨ੍ਰਿਪਾਰਾ ॥ ਕਲਕ ਅਵਟਿ ਸਾਚੇ ਜਨੁ ਢਾਰਾ ॥ ਅਤਿ ਸੁੰਦਰ ਜਨੁ ਮਦਨ ਸਰੂਪਾ ॥ ਜਾਨੁਕ ਬਨੇ ਰੂਪ ਕੋ ਭੂਪਾ ॥੧੨੨॥

Mahaarthee Aru Mahaa Naripaara ॥ Kalaka Avatti Saache Janu Dhaara ॥ At(i) Suandara Janu Madana Saroopa ॥ Jaanuka Bane Roop Ko Bhoopa ॥122॥

महारथी अरु महा न्रिपारा ॥ कलक अवटि साचे जनु ढारा ॥ अति सुंदर जनु मदन सरूपा ॥ जानुक बने रूप को भूपा ॥१२२॥

This king was a great warrior any Sovereign; it seemed that he had been shaped in a mould of gold; like the form of the god of love, this king was so beautiful, that he appeared to be the Sovereign of Beauty.122.

1696712 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧੨


ਬਹੁ ਬਿਧਿ ਕਰੇ ਜੱਗ ਬਿਸਥਾਰਾ ॥ ਬਿਧਵਤ ਹੋਮ ਦਾਨ ਮਖਸਾਰਾ ॥ ਧਰਮ ਧੁਜਾ ਜਹ ਤਹਾ ਬਿਰਾਜੀ ॥ ਇੰਦ੍ਰਾਵਤੀ ਨਿਰਖ ਦੁਤਿ ਲਾਜੀ ॥੧੨੩॥

Bahu Bidhi Kare Jagga Bisatharaa ॥ Bidhavata Homa Daana Makhasaara ॥ Dharam Dhujaa Jaha Tahaa Biraajee ॥ Eiandaraavtee Nirakha Duti Laajee ॥123॥

बहु बिधि करे जग बिसथारा ॥ बिधवत होम दान मखसारा ॥ धरम धुजा जह तहा बिराजी ॥ इंद्रावती निरख दुति लाजी ॥१२३॥

He performed various types of Yajnas and executed hom and bestowed charities according to Vedic injunctions; his banner of the extension of Dharma fluttered here and there and seeing his glory, the abode of Indra felt shy.123.

1696813 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧੩


ਪਗ ਪਗ ਜੱਗ ਖੰਭ ਕਹੁ ਗਾਡਾ ॥ ਘਰਿ ਘਰਿ ਅੰਨਸਾਲ ਕਰਿ ਛਾਡਾ ॥ਭੂਖਾ ਨਾਂਗ ਸੁ ਆਵਤ ਕੋਈ ॥ ਤਤ ਛਿਨ ਇੱਛ ਪੁਰਾਵਤ ਸੋਈ ॥੧੨੪॥

Paga Paga Jagga Khaanbha Kahu Gaadaa ॥ Ghari Ghari Aannasaal Kari Chhaadaa ॥bhookhaa Naag Su aavta Koeala ॥ Tata Chhina Eichchha Puraavta Soeala ॥124॥

पग पग जग ख्मभ कहु गाडा ॥ घरि घरि अंनसाल करि छाडा ॥भूखा नांग सु आवत कोई ॥ तत छिन इछ पुरावत सोई ॥१२४॥

He got planted the columns of Yajnas at short distances; and caused the granaries of corn to be built in every home; the hungry or naked, whosoever came, his desire was fulfilled Immediately.124.

1696914 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੨ ਪੰ. ੧੪


       


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