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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਪਾਧਰੀ ਛੰਦ ॥

Paadharee Chhand ॥

पाधरी छंद ॥

PAADHARI STANZA

170261 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧


ਇਹ ਭਾਂਤ ਰਾਜੁ ਰਘੁਰਾਜ ਕੀਨ ॥ ਗਜ ਬਾਜ ਸਾਜ ਦੀਨਾਨ ਦੀਨ ॥ ਨ੍ਰਿਪ ਜੀਤ ਜੀਤ ਲਿੱਨੇ ਅਪਾਰ ॥ ਕਰਿ ਖੰਡ ਖੰਡ ਖੰਡੇ ਗੜਵਾਰ ॥੧੭੭॥

Eiha Bhaata Raaju Raghuraaja Keena ॥ Gaja Baaja Saaja Deenaana Deena ॥ Naripa Jeeta Jeeta Li`ne Apaar ॥ Kari Khaanda Khaanda Khaande Garhavaar ॥177॥

इह भांत राजु रघुराज कीन ॥ गज बाज साज दीनान दीन ॥ न्रिप जीत जीत लिने अपार ॥ करि खंड खंड खंडे गड़वार ॥१७७॥

The king Raghu ruled in this way and gave in charity the elephants and horses to the poor; he conquered many kings and shattered many forts.177.

170272 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੨


ਇਤਿ ਰਘੁਰਾਜ ਸਮਾਪਤਹਿ ॥

Eiti Raghuraaja Samaapatahi ॥

इति रघुराज समापतहि ॥

End of “The Rule of king Raghu.”

170283 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੩


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

170294 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੪


ਅਥ ਅਜ ਰਾਜਾ ਕੋ ਰਾਜ ਕਥਨੰ ॥

Ath Aja Raajaa Ko Raaja Kathnaan ॥

अथ अज राजा को राज कथनं ॥

Now begins the description of the rule of king Aj

170305 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੫


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

Paadharhee Chhand ॥

पाधड़ी छंद ॥

PAADHARI STANZA

170316 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੬


ਫੁਨਿ ਭਏ ਰਾਜ ਅਜਰਾਜ ਬੀਰ ॥ ਜਿਨ ਭਾਂਤਿ ਭਾਂਤਿ ਜਿੱਤੇ ਪ੍ਰਬੀਰ ॥ ਕਿੱਨੇ ਖਰਾਬ ਖਾਨੇ ਖਵਾਸ ॥ ਜਿੱਤੇ ਮਹੀਪ ਤੋਰੇ ਮਵਾਸ ॥੧॥

Phuni Bhaee Raaja Ajaraaja Beera ॥ Jina Bhaat(i) Bhaat(i) Jitte Parabeera ॥ Ki`ne Kharaaba Khaane Khavaas ॥ Jitte Maheepa Tore Mavaas ॥1॥

फुनि भए राज अजराज बीर ॥ जिन भांति भांति जिते प्रबीर ॥ किने खराब खाने खवास ॥ जिते महीप तोरे मवास ॥१॥

Then there ruled the great and powerful king Aj, who destroyed several clans after conquering many heroes; he also conquered the rebellious kings.1.

170327 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੭


ਜਿੱਤੇ ਅਜੀਤ ਮੁੰਡੇ ਅਮੁੰਡ ॥ ਖੰਡੇ ਅਖੰਡ ਕਿੰਨੇ ਘਮੰਡ ॥ ਦਸ ਚਾਰਿ ਚਾਰਿ ਬਿਦਿਆ ਨਿਧਾਨ ॥ ਅਜ ਰਾਜ ਰਾਜ ਰਾਜਾ ਮਹਾਨ ॥੨॥

Jitte Ajeeta Muande Amuanda ॥ Khaande Akhaanda Kianne Ghamaanda ॥ Dasa Chaari Chaari Bidiaa Nidhaana ॥ Aja Raaja Raaja Raajaa Mahaana ॥2॥

जिते अजीत मुंडे अमुंड ॥ खंडे अखंड किंने घमंड ॥ दस चारि चारि बिदिआ निधान ॥ अज राज राज राजा महान ॥२॥

He conquered many invincible kings and shattered the pride of many egoistic kings; the great king Aj was the ocean of fourteen sciences.2.

170338 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੮


ਸੂਰਾ ਸੁਬਾਹ ਜੋਧਾ ਪ੍ਰਚੰਡ ॥ ਸ੍ਰੁਤ ਸਰਬ ਸ਼ਾਸਤ੍ਰ ਬਿੱਦਿਆ ਉਦੰਡ ॥ ਮਾਨੀ ਮਹਾਨ ਸੁੰਦਰ ਸਰੂਪ ॥ ਅਵਿਲੋਕ ਜਾਸ ਲਾਜੰਤ ਭੂਪ ॥੩॥

Sooraa Subaaha Jodhaa Parachaanda ॥ Saruta Sarab Shaastra Bi`diaa Audaanda ॥ Maanee Mahaana Suandara Saroop ॥ Aviloka Jaas Laajaanta Bhoop ॥3॥

सूरा सुबाह जोधा प्रचंड ॥ स्रुत सरब शासत्र बिदिआ उदंड ॥ मानी महान सुंदर सरूप ॥ अविलोक जास लाजंत भूप ॥३॥

That king was a powerful warrior and expert in the study of Shrutis (Vedas) and Shastras; that great king was full of self-pride and had a very charming face, seeing which all the kings felt shy.3.

170349 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੯


ਰਾਜਾਨ ਰਾਜ ਰਾਜਾਧਿਰਾਜ ॥ ਗ੍ਰਹਿ ਭਰੇ ਸਰਬ ਸੰਪਤਿ ਸਮਾਜ ॥ ਅਵਿਲੋਕਿ ਰੂਪ ਰੀਝੰਤ ਨਾਰ ॥ ਸ੍ਰੁਤ ਦਾਨ ਸੀਲ ਬਿਦਿਆ ਉਦਾਰ ॥੪॥

Raajaana Raaja Raajaadhiraaja ॥ Garahi Bhare Sarab Saanpat(i) Samaaja ॥ Aviloki Roop Reejhaanta Naar ॥ Saruta Daana Seela Bidiaa Audaar ॥4॥

राजान राज राजाधिराज ॥ ग्रहि भरे सरब स्मपति समाज ॥ अविलोकि रूप रीझंत नार ॥ स्रुत दान सील बिदिआ उदार ॥४॥

That Sovereign was king of kings and in his kingdom, all the houses were full of wealth; the women were allured on seeing his beauty and he was the knower of the mysteries of the Vedas; he was a great donor, skilful in sciences and a very gentle king.4.

1703510 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧੦


ਜੌ ਕਹੋ ਕਥਾ ਬਾਢੰਤ ਗ੍ਰੰਥ ॥ ਸੁਣਿ ਲੇਹੁ ਮਿਤ੍ਰ ਸੰਛੇਪ ਕੰਥ ॥ ਬੈਦਰਭ ਦੇਸ ਰਾਜਾ ਸੁਬਾਹ ॥ ਚੰਪਾਵਤੀ ਸੁ ਗ੍ਰਹਿ ਨਾਰਿ ਤਾਹਿ ॥੫॥

Jou Kaho Katha Baadhaanta Garaantha ॥ Suni Lehu Mitara Saanchhepa Kaantha ॥ Baidarabha Desa Raajaa Subaaha ॥ Chaanpaavtee Su Garahi Naari Taahi ॥5॥

जौ कहो कथा बाढंत ग्रंथ ॥ सुणि लेहु मित्र संछेप कंथ ॥ बैदरभ देस राजा सुबाह ॥ च्मपावती सु ग्रहि नारि ताहि ॥५॥

If I relate the whole story, I fear the Granth to become voluminous; therefore, O friend ! listen this story only in brief; there was a king named Subahu in Vidrabha country, the name of whose queen was Champavati.5.

1703611 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧੧


ਤਿਹ ਜਈ ਏਕ ਕੰਨਿਆ ਅਪਾਰ ॥ ਤਿਹ ਮਤੀ ਇੰਦ੍ਰ ਨਾਮਾ ਉਦਾਰ ॥ ਜਬ ਭਈ ਜੋਗ ਬਰ ਕੇ ਕੁਮਾਰ ॥ ਤਬ ਕੀਨ ਬੈਠ ਰਾਜਾ ਬਿਚਾਰ ॥੬॥

Tiha Jaeala Eeka Kaanniaa Apaar ॥ Tiha Matee Eiandara Naama Audaar ॥ Jaba Bhaeala Joga Bara Ke Kumaar ॥ Taba Keena Baittha Raajaa Bichaar ॥6॥

तिह जई एक कंनिआ अपार ॥ तिह मती इंद्र नामा उदार ॥ जब भई जोग बर के कुमार ॥ तब कीन बैठ राजा बिचार ॥६॥

She gave birth to a daughter, whose name was Indumati; when she attained the marriageable age, the king then consulted his ministers.6.

1703712 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧੨


ਲਿੰਨੇ ਬੁਲਾਇ ਨ੍ਰਿਪ ਸਰਬ ਦੇਸ ॥ ਧਾਏ ਸੁਬਾਹ ਲੈ ਦਲ ਅਸੇਸ ॥ ਮੁਖ ਭਈ ਆਨ ਸਰਸ੍ਵਤੀ ਆਪ ॥ ਜਿਹ ਜਪਤ ਲੋਗ ਮਿਲਿ ਸਰਬ ਜਾਪ ॥੭॥

Lianne Bulaaei Naripa Sarab Desa ॥ Dhaaee Subaaha Lai Dala Asesa ॥ Mukha Bhaeala Aana Sarasavatee Aapa ॥ Jiha Japata Loga Mili Sarab Jaapa ॥7॥

लिंने बुलाइ न्रिप सरब देस ॥ धाए सुबाह लै दल असेस ॥ मुख भई आन सरस्वती आप ॥ जिह जपत लोग मिलि सरब जाप ॥७॥

The king invited the kings of all the countries, who came to the kingdom of Subahu with their armies; the adorable goddess Sarasvati came to reside in the mouths of all them and all of them with the desire of marrying that girl, offered prayers alongwith

1703813 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧੩


ਤਬ ਦੇਸ ਦੇਸ ਕੇ ਭੂਪ ਆਨ ॥ ਕਿਨੌ ਪ੍ਰਣਾਮ ਰਾਜਾ ਮਹਾਨ ॥ ਤਹ ਬੈਠ ਰਾਜ ਸੋਭੰਤ ਐਸ ॥ ਜਨ ਦੇਵ ਮੰਡਲੀ ਸਮ ਨ ਤੈਸ ॥੮॥

Taba Desa Desa Ke Bhoop Aana ॥ Kinou Paranaam Raajaa Mahaana ॥ Taha Baittha Raaja Sobhaanta Aaisa ॥ Jana Deva Maandalee Sama Na Taisa ॥8॥

तब देस देस के भूप आन ॥ किनौ प्रणाम राजा महान ॥ तह बैठ राज सोभंत ऐस ॥ जन देव मंडली सम न तैस ॥८॥

All the kings of various countries came and bowed before that king Subahu nad sat in the assembly, where their glory excelled that of the assembly of gods.8.

1703914 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੧੭ ਪੰ. ੧੪


       


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