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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਕਬਹੂੰ ਨ ਪਾਪ ਜਿਹ ਛੁਹਾ ਅੰਗ ॥ ਗੁਨ ਗਨ ਸਪੰਨ ਸੁੰਦਰ ਸੁਰੰਗ ॥ ਲੰਗੋਟ ਬੰਦ ਅਵਧੂਤ ਗਾਤ ॥ ਚਕਿ ਰਹੀ ਚਿੱਤ ਅਵਿਲੋਕ ਮਾਤ ॥੫੬॥

Kabahooan Na Paapa Jiha Chhuhaa Ang ॥ Guna Gana Sapaanna Suandara Surang ॥ Laangotta Baanda Avadhoota Gaata ॥ Chaki Rahee Chitta Aviloka Maata ॥56॥

कबहूं न पाप जिह छुहा अंग ॥ गुन गन सपंन सुंदर सुरंग ॥ लंगोट बंद अवधूत गात ॥ चकि रही चित अविलोक मात ॥५६॥

The sin had not even touched him and he was elegant in virtues; the Yogi Dutt wore loin-cloth and seeing him, mother was wonder-struck.56.

172501 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧


ਸੰਨਯਾਸ ਦੇਵ ਅਨਭੂਤ ਅੰਗ ॥ ਲਾਜੰਤ ਦੇਖ ਜਿਹਿ ਦੁਤਿ ਅਨੰਗ ॥ ਮੁਨ ਦੱਤ ਦੇਵ ਸੰਨਯਾਸ ਰਾਜ ॥ ਜਿਹ ਸਧੇ ਸਰਬ ਸੰਨਯਾਸ ਸਾਜ ॥੫੭॥

Saannayaas Deva Anabhoota Ang ॥ Laajaanta Dekha Jihi Duti Anang ॥ Muna Datta Deva Saannayaas Raaja ॥ Jiha Sadhe Sarab Saannayaas Saaja ॥57॥

संनयास देव अनभूत अंग ॥ लाजंत देख जिहि दुति अनंग ॥ मुन दत देव संनयास राज ॥ जिह सधे सरब संनयास साज ॥५७॥

Seeing the greatest Sannyasi Dutt, having comely limbs, even the god of love felt shy ; the sage Dutt was the king of Sannyasis and he had practiced all kinds of the activities of Sannyas.57.

172512 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੨


ਪਰਮੰ ਪਵਿਤ੍ਰ ਜਾ ਕੇ ਸਰੀਰ ॥ ਕਬਹੂ ਨ ਕਾਮ ਕਿੱਨੋ ਅਧੀਰ ॥ ਜਟ ਜੋਗ ਜਾਸ ਸੋਭੰਤ ਸੀਸ ॥ ਅਸ ਧਰਾ ਰੂਪ ਸੰਨਯਾਸ ਈਸ ॥੫੮॥

Paraman Pavitara Jaa Ke Sreera ॥ Kabahoo Na Kaam Ki`no Adheera ॥ Jatta Joga Jaas Sobhaanta Seesa ॥ Asa Dharaa Roop Saannayaas Ealasa ॥58॥

परमं पवित्र जा के सरीर ॥ कबहू न काम किनो अधीर ॥ जट जोग जास सोभंत सीस ॥ अस धरा रूप संनयास ईस ॥५८॥

His body was immaculate, which had never been troubled by lust; on his head there was a tuft of matted locks; such a form was adopted by Dutt, the incarnation of Rudra.58.

172523 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੩


ਆਭਾ ਅਪਾਰ ਕਥਿ ਸਕੈ ਕਉਨ ॥ ਸੁਨ ਰਹੈ ਜੱਛ ਗੰਧ੍ਰਬ ਮਉਨ ॥ ਚਕਿ ਰਹਿਓ ਬ੍ਰਹਮ ਆਭਾ ਬਿਚਾਰ ॥ ਲਾਜਯੋ ਅਨੰਗ ਆਭਾ ਨਿਹਾਰ ॥੫੯॥

Aabhaa Apaar Kathi Sakai Kauna ॥ Suna Rahai Jachchha Gaandharaba Mauna ॥ Chaki Rahiaoa Barahama Aabhaa Bichaar ॥ Laajayo Anang Aabhaa Nihaar ॥59॥

आभा अपार कथि सकै कउन ॥ सुन रहै जछ गंध्रब मउन ॥ चकि रहिओ ब्रहम आभा बिचार ॥ लाजयो अनंग आभा निहार ॥५९॥

Who can describe his fine glory ? And listening to his appreciation, the Yakshas and Gandharvas become silent; Brahma was also wonder-struck to see his glory; and even the god of love felt shy on seeing his beauty.59.

172534 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੪


ਅਤਿ ਗਿਆਨਵੰਤ ਕਰਮਨ ਪ੍ਰਬੀਨ ॥ ਅਨ ਆਸ ਗਾਤ ਹਰਿ ਕੇ ਅਧੀਨ ॥ ਛਬਿ ਦਿਪਤ ਕੋਟ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਮਾਨ ॥ ਚਕ ਰਹਾ ਚੰਦ ਲਖਿ ਆਸਮਾਨ ॥੬੦॥

At(i) Giaanavaanta Karamna Parabeena ॥ Ana Aas Gaata Hari Ke Adheena ॥ Chhabi Dipata Kotta Sooraja Paramana ॥ Chaka Rahaa Chaanda Lakhi Aasmaana ॥60॥

अति गिआनवंत करमन प्रबीन ॥ अन आस गात हरि के अधीन ॥ छबि दिपत कोट सूरज प्रमान ॥ चक रहा चंद लखि आसमान ॥६०॥

He was extremely learned, expert in actions, beyond the desires and obedient to the Lord; his elegance was like the crores of suns and the moon was also wonder-struck on seeing him.60.

172545 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੫


ਉਪਜਿਯਾ ਆਪ ਇਕ ਜੋਗ ਰੂਪ ॥ ਪੁਨ ਲਗੇ ਜੋਗ ਸਾਧਨ ਅਨੂਪ ॥ ਗ੍ਰਹਿ ਪ੍ਰਿਥਮ ਛਾਡਿ ਉਠਿ ਚਲਾ ਦੱਤ ॥ ਪਰਮੰ ਪਵਿਤ੍ਰ ਨਿਰਮਲੀ ਮੱਤਿ ॥੬੧॥

Aupajiyaa Aapa Eika Joga Roop ॥ Puna Lage Joga Saadhana Anoop ॥ Garahi Parithama Chhaadi Autthi Chalaa Datta ॥ Paraman Pavitara Niramlee Matti ॥61॥

उपजिया आप इक जोग रूप ॥ पुन लगे जोग साधन अनूप ॥ ग्रहि प्रिथम छाडि उठि चला दत ॥ परमं पवित्र निरमली मति ॥६१॥

He had manifested as the apparent form of yoga and then had been absorbed in the practice of Yoga; that immaculate Dutt of pure intellect did the first thing of leaving his home.61.

172556 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੬


ਜਬ ਕੀਨ ਜੋਗ ਬਹੁ ਦਿਨ ਪ੍ਰਮਾਨ ॥ ਤਬ ਕਾਲ ਦੇਵ ਰੀਝੇ ਨਿਧਾਨ ॥ ਇਮ ਭਈ ਬਿਓਮ ਬਾਣੀ ਬਨਾਇ ॥ ਤੁਮ ਸੁਣਹੁ ਬੈਨ ਸੰਨਯਾਸ ਰਾਇ ॥੬੨॥

Jaba Keena Joga Bahu Dina Paramana ॥ Taba Kaal Deva Reejhe Nidhaana ॥ Eima Bhaeala Biaoama Baanee Banaaei ॥ Tuma Sunahu Baina Saannayaas Raaei ॥62॥

जब कीन जोग बहु दिन प्रमान ॥ तब काल देव रीझे निधान ॥ इम भई बिओम बाणी बनाइ ॥ तुम सुणहु बैन संनयास राइ ॥६२॥

When he practiced Yoga for a long time, Kaldev (the Lord) was pleased with him; at that time, there was a heavenly voice; “O king of Yogis ! Listen to what I say.”62.

172567 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੭


ਅਕਾਸ਼ ਬਾਣੀ ਬਾਚਿ ਦੱਤ ਪ੍ਰਤਿ ॥

Akaasha Baanee Baachi Datta Parat(i) ॥

अकाश बाणी बाचि दत प्रति ॥

Voice from heaven addressed to Dutt :

172578 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੮


ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

Paadharhee Chhand ॥

पाधड़ी छंद ॥

PAADHARI STANZA

172589 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੯


ਗੁਰ ਹੀਣ ਮੁਕਤ ਨਹੀ ਹੋਤ ਦੱਤ ॥ ਤੁਹਿ ਕਹੋ ਬਾਤ ਸੁਨਿ ਬਿਮਲ ਮੱਤ ॥ ਗੁਰਿ ਕਰਹਿ ਪ੍ਰਿਥਮ ਤਬ ਹੋਹਿ ਮੁਕਤਿ ॥ ਕਹਿ ਦੀਨ ਕਾਲ ਤਿਹ ਜੋਗ ਜੁਗਤਿ ॥੬੩॥

Gura Heena Mukata Nahee Hota Datta ॥ Tuhi Kaho Baata Suni Bimala Matta ॥ Guri Karahi Parithama Taba Hohi Mukat(i) ॥ Kahi Deena Kaal Tiha Joga Jugat(i) ॥63॥

गुर हीण मुकत नही होत दत ॥ तुहि कहो बात सुनि बिमल मत ॥ गुरि करहि प्रिथम तब होहि मुकति ॥ कहि दीन काल तिह जोग जुगति ॥६३॥

“O Dutt ! Listen to me with pure intellect; I say unto you that there can be no salvation without the Guru; first of all, adopt a Guru, then you will be redeemed, in this way, KAL told the method of Yoga to Dutt.63.

1725910 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧੦


ਬਹੁ ਭਾਂਤ ਦੱਤ ਦੰਡਵਤ ਕੀਨ ॥ ਆਸਾ ਬਿਰਹਿਤ ਹਰਿ ਕੋ ਅਧੀਨ ॥ ਬਹੁ ਭਾਂਤ ਜੋਗ ਸਾਧਨਾ ਸਾਧ ॥ ਆਦੱਗ ਜੋਗ ਮਹਿਮਾ ਅਗਾਧ ॥੬੪॥

Bahu Bhaata Datta Daandavata Keena ॥ Aasa Birahita Hari Ko Adheena ॥ Bahu Bhaata Joga Saadhanaa Saadha ॥ Aadagga Joga Mahimaa Agaadha ॥64॥

बहु भांत दत दंडवत कीन ॥ आसा बिरहित हरि को अधीन ॥ बहु भांत जोग साधना साध ॥ आदग जोग महिमा अगाध ॥६४॥

Obedient to the Lord and abiding beyond the desires, Dutt prostrated before the Lord in various ways; he practiced Yoga in different ways and spread the exaltation of Yoga.64.

1726011 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧੧


ਤਬ ਨਮਸ਼ਕਾਰ ਕਰਿ ਦੱਤ ਦੇਵ ॥ ਉਚਰੰਤ ਪਰਮ ਉਸਤਤਿ ਅਭੇਵ ॥ ਜੋਗੀਨ ਜੋਗ ਰਾਜਾਨ ਰਾਜ ॥ ਅਨਭੂਤ ਅੰਗ ਜਹ ਤਹ ਬਿਰਾਜ ॥੬੫॥

Taba Namashakaar Kari Datta Deva ॥ Aucharaanta Param Ausatti Abheva ॥ Jogeena Joga Raajaana Raaja ॥ Anabhoota Ang Jaha Taha Biraaja ॥65॥

तब नमशकार करि दत देव ॥ उचरंत परम उसतति अभेव ॥ जोगीन जोग राजान राज ॥ अनभूत अंग जह तह बिराज ॥६५॥

Then Dutt, bowing before the Lord, eulogized the Unmanifested Brahman who is the Sovereign of Sovereigns, the supreme Yogi and with unique limbs pervades everywhere.65

1726112 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧੨


ਜਲ ਥਲ ਬਿਯਾਪ ਜਿਹ ਤੇਜ ਏਕ ॥ ਗਾਵੰਤ ਜਾਸੁ ਮੁਨਿ ਗਨ ਅਨੇਕ ॥ਜਿਹ ਨੇਤ ਨੇਤ ਭਾਖੰਤ ਨਿਗਮ ॥ ਤੇ ਆਦਿ ਅੰਤ ਮੱਧਹ ਅਗਮ ॥੬੬॥

Jala Thala Biyaapa Jiha Teja Eeka ॥ Gaavnta Jaasu Muni Gana Aneka ॥jiha Neta Neta Bhaakhaanta Nigama ॥ Te Aadi Aanta Ma`dhaha Agama ॥66॥

जल थल बियाप जिह तेज एक ॥ गावंत जासु मुनि गन अनेक ॥जिह नेत नेत भाखंत निगम ॥ ते आदि अंत मधह अगम ॥६६॥

The splendour of that Lord Pervades in after an on plain and many sages sing His Praises; He, whom the Vedas etc. call “Neti, neti” (not this, not this), that Lord is eternal and Pervades in beginning, in the middle and at the end.66.

1726213 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧੩


ਜਿਹ ਏਕ ਰੂਪ ਕਿੰਨੇ ਅਨੇਕ ॥ ਪੁਹਮੀ ਅਕਾਸ਼ ਕਿੰਨੇ ਬਿਬੇਕ ॥ ਜਲਬਾ ਥਲੇਸ ਸਭ ਠੌਰ ਜਾਨ ॥ ਅਨਭਯ ਅਜੋਨ ਅਨ ਆਸਮਾਨ ॥੬੭॥

Jiha Eeka Roop Kianne Aneka ॥ Puhamee Akaasha Kianne Bibeka ॥ Jalabaa Thalesa Sabha Tthoura Jaana ॥ Anabhaya Ajona Ana Aasmaana ॥67॥

जिह एक रूप किंने अनेक ॥ पुहमी अकाश किंने बिबेक ॥ जलबा थलेस सभ ठौर जान ॥ अनभय अजोन अन आसमान ॥६७॥

He who created many beings from one and with His Power of wisdom, created the earth and the sky; that fearless, birthless and beyond desires is there at all the places in water and on plain.67.

1726314 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੩੩ ਪੰ. ੧੪


       


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