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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਅਥ ਮਾਛੀ ਸਪਤਮੋ ਗੁਰੂ ਕਥਨੰ ॥

Ath Maachhee Sapatamo Guroo Kathnaan ॥

अथ माछी सपतमो गुरू कथनं ॥

Now begins the description of Fisherman as the Seventh Guru

174601 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPI

174612 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੨


ਆਗੇ ਚਲਾ ਰਾਜ ਸੰਨਯਾਸਾ ॥ ਮਹਾ ਬਿਮਲ ਮਨ ਭਯੋ ਉਦਾਸਾ ॥ ਨਿਰਖਾ ਤਹਾਂ ਏਕ ਮੱਛਹਾ ॥ ਲਾਏ ਜਾਰ ਕਰ ਜਾਤਨ ਕਹਾ ॥੧੯੨॥

Aage Chalaa Raaja Saannayaasa ॥ Mahaa Bimala Mana Bhayo Audaasa ॥ Nirakhaa Tahaa Eeka Machchhahaa ॥ Laaee Jaar Kara Jaatana Kahaa ॥192॥

आगे चला राज संनयासा ॥ महा बिमल मन भयो उदासा ॥ निरखा तहां एक मछहा ॥ लाए जार कर जातन कहा ॥१९२॥

That great ascetic Dutt, of the pure mind moved further; there he saw a Fisherman going with his net.192.

174623 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੩


ਬਰਛੀ ਏਕ ਹਾਥ ਮੋ ਧਾਰੇ ॥ ਜਰੀਆ ਅੰਧ ਕੰਧ ਪਰ ਡਾਰੇ ॥ ਇਸਥਿਤ ਏਕ ਮੱਛਿ ਕੀ ਆਸਾ ॥ ਜਾਨੁਕ ਵਾ ਕੇ ਮੱਧ ਨ ਸਾਸਾ ॥੧੯੩॥

Barachhee Eeka Haath Mo Dhaare ॥ Jareeaa Aandha Kaandha Para Daare ॥ Eisathita Eeka Machchhi Kee Aasa ॥ Jaanuka Vaa Ke Ma`dha Na Saasa ॥193॥

बरछी एक हाथ मो धारे ॥ जरीआ अंध कंध पर डारे ॥ इसथित एक मछि की आसा ॥ जानुक वा के मध न सासा ॥१९३॥

He was holding his lance in one of his hands and was carrying the net on one shoulder; he was standing there for the sake of the fish in such a way as if his body had become breathless.193.

174634 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੪


ਏਕ ਸੁ ਠਾਂਢ ਮੱਛ ਕੀ ਆਸੂ ॥ ਰਾਜ ਪਾਟ ਤੇ ਜਾਨ ਉਦਾਸੂ ॥ ਇਹ ਬਿਧ ਨੇਹ ਨਾਥ ਸੌ ਈਐ ॥ ਤਬ ਹੀ ਪੂਰਨ ਪੁਰਖ ਕਹ ਪਈਐ ॥੧੯੪॥

Eeka Su Tthaadha Machchha Kee Aasoo ॥ Raaja Paatta Te Jaana Audaasoo ॥ Eiha Bidha Neha Naath Sou Ealaai ॥ Taba Hee Poorana Purakha Kaha Paealaai ॥194॥

एक सु ठांढ मछ की आसू ॥ राज पाट ते जान उदासू ॥ इह बिध नेह नाथ सौ ईऐ ॥ तब ही पूरन पुरख कह पईऐ ॥१९४॥

He was standing with the desire of catching one fish in such a way as if someone standing with patience and detached from all his paraphernalia; Dutt thought that if such a love was observed for the sake of the Lord, then that perfect Purusha i.e. the Lo

174645 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੫


ਇਤਿ ਮਾਛੀ ਗੁਰੂ ਸਪਤਮੋ ਸਮਾਪਤੰ ॥੭॥

Eiti Maachhee Guroo Sapatamo Samaapataan ॥7॥

इति माछी गुरू सपतमो समापतं ॥७॥

End of the description of the adoption of Fisherman as the seventh Guru.

174656 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੬


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

174667 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੭


ਅਥ ਚੇਰੀ ਅਸ਼ਟਮੋ ਗੁਰੂ ਕਥਨੰ ॥

Ath Cheree Ashattamo Guroo Kathnaan ॥

अथ चेरी अशटमो गुरू कथनं ॥

Now begins the description of he adopt of Maid-servant as the Eighth Guru

174678 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੮


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPAI

174689 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੯


ਹਰਖਤ ਅੰਗ ਸੰਗ ਸੈਨਾ ਸੁਨ ॥ ਆਯੋ ਦੱਛ ਪ੍ਰਜਾਪਤਿ ਕੇ ਮੁਨ ॥ ਤਹਾਂ ਏਕ ਚੇਰਕਾ ਨਿਹਾਰੀ ॥ ਚੰਦਨ ਘਸਤ ਮਨੋ ਮਤਵਾਰੀ ॥੧੯੫॥

Harakhata Ang Sang Sainaa Suna ॥ Aayo Dachchha Parajaapat(i) Ke Muna ॥ Tahaa Eeka Cherakaa Nihaaree ॥ Chaandana Ghasat Mano Matvaaree ॥195॥

हरखत अंग संग सैना सुन ॥ आयो दछ प्रजापति के मुन ॥ तहां एक चेरका निहारी ॥ चंदन घसत मनो मतवारी ॥१९५॥

When the sage Dutt reached the abode of Daksha Prajapati, he was greatly pleased alongwith his army; there the sage Dutt saw a maid-servant, who, being intoxicated, was rubbing the sandalwood.195.

1746910 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧੦


ਚੰਦਨ ਘਸਤ ਨਾਰ ਸ਼ੁਭ ਧਰਮਾ ॥ ਏਕ ਚਿਤ ਹ੍ਵੈ ਆਪਨ ਘਰ ਮਾ ॥ ਇਕ ਚਿੱਤ ਨਹੀ ਚਿੱਤ ਚਲਾਵੈ ॥ ਪ੍ਰਿਤਮਾ ਚਿਤ੍ਰ ਬਿਲੋਕ ਲਜਾਵੈ ॥੧੯੬॥

Chaandana Ghasat Naar Shubha Dharama ॥ Eeka Chita Havai Aapana Ghara Maa ॥ Eika Chitta Nahee Chitta Chalaavi ॥ Paritamaa Chitara Biloka Lajaavi ॥196॥

चंदन घसत नार शुभ धरमा ॥ एक चित ह्वै आपन घर मा ॥ इक चित नही चित चलावै ॥ प्रितमा चित्र बिलोक लजावै ॥१९६॥

That lady of good conduct was grinding sandalwood single-mindedly in her home; she had concentrated her mind and seeing her even the portrait was getting shy.196.

1747011 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧੧


ਦੱਤ ਲਏ ਸੰਨਯਾਸਨ ਸੰਗਾ ॥ ਜਾਤ ਭਯੋ ਤਹ ਭੇਟਤ ਅੰਗਾ ॥ ਸੀਸ ਉਚਾਇ ਨ ਤਾਸ ਨਿਹਾਰਾ ॥ ਰਾਵ ਰੰਕ ਕੋ ਜਾਤ ਬਿਚਾਰਾ ॥੧੯੭॥

Datta Laee Saannayaasna Sang ॥ Jaata Bhayo Taha Bhettata Ang ॥ Seesa Auchaaei Na Taas Nihaara ॥ Raav Raanka Ko Jaata Bichaara ॥197॥

दत लए संनयासन संगा ॥ जात भयो तह भेटत अंगा ॥ सीस उचाइ न तास निहारा ॥ राव रंक को जात बिचारा ॥१९७॥

Dutt went that way alongwith the Sannyasis in order to meet her, but she did not raise her head and see whether some king or some pauper was going.197.

1747112 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧੨


ਤਾ ਕੋ ਦੱਤ ਬਿਲੋਕ ਪ੍ਰਭਾਵਾ ॥ ਅਸ਼ਟਮ ਗੁਰੂ ਤਾਹਿ ਠਹਰਾਵਾ ॥ ਧੰਨਿ ਧੰਨਿ ਇਹ ਚੇਰਕਾ ਸਭਾਗੀ ॥ ਜਾ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤ ਨਾਥ ਸੰਗਿ ਲਾਗੀ ॥੧੯੮॥

Taa Ko Datta Biloka Parabhaav ॥ Ashattama Guroo Taahi Tthaharaav ॥ Dhaanni Dhaanni Eiha Cherakaa Sabhaagee ॥ Jaa Kee Pareeta Naath Saangi Laagee ॥198॥

ता को दत बिलोक प्रभावा ॥ अशटम गुरू ताहि ठहरावा ॥ धंनि धंनि इह चेरका सभागी ॥ जा की प्रीत नाथ संगि लागी ॥१९८॥

Seeing her impact, Dutt accepted her as the eighth Guru and said, “Blessed is this maid-servant, who is absorbed in love with that Lord.”198.

1747213 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧੩


ਐਸ ਪ੍ਰੀਤ ਹਰਿ ਹੋਤ ਲਗੱਇਯੈ ॥ ਤਬ ਹੀ ਨਾਥ ਨਿਰੰਜਨ ਪੱਇਯੈ ॥ ਬਿਨ ਚਿਤਿ ਦੀਨ ਹਾਥ ਨਹੀ ਆਵੈ ॥ ਚਾਰ ਬੇਦ ਇਮ ਭੇਦ ਬਤਾਵੈ ॥੧੯੯॥

Aaisa Pareeta Hari Hota Laga`eiyai ॥ Taba Hee Naath Niraanjana Pa`eiyai ॥ Bina Chiti Deena Haath Nahee aavi ॥ Chaar Beda Eima Bheda Bataavi ॥199॥

ऐस प्रीत हरि होत लगइयै ॥ तब ही नाथ निरंजन पइयै ॥ बिन चिति दीन हाथ नही आवै ॥ चार बेद इम भेद बतावै ॥१९९॥

When such a love is observed with that Lord, then He is realized; He is not achieved without bringing humility in the mind and all the four Vedas tell this.199.

1747314 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੪੮ ਪੰ. ੧੪


       


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