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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਕ੍ਰਿਪਾਣ ਕ੍ਰਿਤ ਛੰਦ ॥

Karipaana Karita Chhand ॥

क्रिपाण क्रित छंद ॥

KRIPAN KRIT STANZA

177121 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧


ਮੁਨਿਅਤਿ ਅਪਾਰ ॥ ਗੁਣ ਗਣ ਉਦਾਰ ॥ ਬਿੱਦਿਆ ਬਿਚਾਰ ॥ ਨਿਤ ਕਰਤ ਚਾਰ ॥੩੮੯॥

Muniat(i) Apaar ॥ Guna Gana Audaar ॥ Bi`diaa Bichaar ॥ Nita Karata Chaar ॥389॥

मुनिअति अपार ॥ गुण गण उदार ॥ बिदिआ बिचार ॥ नित करत चार ॥३८९॥

The sage, benevolent in qualities, was a thinker about learning and always practiced his learning.389.

177132 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੨


ਲਖਿ ਛਬਿ ਸੁਰੰਗ ॥ ਲਾਜਤ ਅਨੰਗ ॥ ਪਿਖ ਬਿਮਲ ਅੰਗ ॥ ਚਕਿ ਰਹਤ ਗੰਗ ॥੩੯੦॥

Lakhi Chhabi Surang ॥ Laajata Anang ॥ Pikha Bimala Ang ॥ Chaki Rahata Gang ॥390॥

लखि छबि सुरंग ॥ लाजत अनंग ॥ पिख बिमल अंग ॥ चकि रहत गंग ॥३९०॥

Seeing his beauty, the god of love felt shy and seeing the purity of his limabs, the Ganges was wonder-struck.390.

177143 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੩


ਲਖਿ ਦੁਤਿ ਅਪਾਰ ॥ ਰੀਝਤ ਕੁਮਾਰ ॥ ਗਯਾਨੀ ਅਪਾਰ ॥ ਗੁਨ ਗਨ ਉਦਾਰ ॥੩੯੧॥

Lakhi Duti Apaar ॥ Reejhata Kumaar ॥ Gayaanee Apaar ॥ Guna Gana Audaar ॥391॥

लखि दुति अपार ॥ रीझत कुमार ॥ गयानी अपार ॥ गुन गन उदार ॥३९१॥

Seeing his comeliness all the princes felt pleased, because he was the greatest scholar and generous and accomplished person.391.

177154 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੪


ਅਬਯਕਤ ਅੰਗ ॥ ਆਭਾ ਅਭੰਗ ॥ ਸੋਭਾ ਸੁਰੰਗ ॥ ਤਨ ਜਨ ਅਨੰਗ ॥੩੯੨॥

Abayakata Ang ॥ Aabhaa Abhang ॥ Sobhaa Surang ॥ Tana Jana Anang ॥392॥

अबयकत अंग ॥ आभा अभंग ॥ सोभा सुरंग ॥ तन जन अनंग ॥३९२॥

The glory of his limbs was indescribable; he was pretty like the god of love.392.

177165 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੫


ਬਹੁ ਕਰਤ ਨਯਾਸ ॥ ਨਿਸਦਿਨ ਉਦਾਸ ॥ ਤਜਿ ਸਰਬ ਆਸ ॥ ਅਤਿ ਬੁੱਧਿ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ॥੩੯੩॥

Bahu Karata Nayaas ॥ Nisadina Audaas ॥ Taji Sarab Aas ॥ At(i) Bu`dhi Parakaasha ॥393॥

बहु करत नयास ॥ निसदिन उदास ॥ तजि सरब आस ॥ अति बुधि प्रकाश ॥३९३॥

He performed many practices detachedly night and day and had relinquished all the desires because of the unfoldment of knowledge.393.

177176 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੬


ਤਨ ਸਹਤ ਧੂਪ ॥ ਸੰਨਯਾਸ ਭੂਪ ॥ ਤਨਿ ਛਬਿ ਅਨੂਪ ॥ ਜਨੁ ਸ਼ਿਵ ਸਰੂਪ ॥੩੯੪॥

Tana Sahata Dhoop ॥ Saannayaas Bhoop ॥ Tani Chhabi Anoop ॥ Janu Shiva Saroop ॥394॥

तन सहत धूप ॥ संनयास भूप ॥ तनि छबि अनूप ॥ जनु शिव सरूप ॥३९४॥

The sage Dutt, the king of Sannyas looked very beautiful like Shiva, while enduring the sunshine on his body, allied with unique comeliness.394.

177187 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੭


ਮੁਖਿ ਛਬਿ ਪ੍ਰਚੰਡ ॥ ਆਡਾਂ ਅਭੰਗ ॥ ਜੁਟਿ ਜੋਗ ਜੰਗ ॥ ਨਹੀ ਮੁਰਤ ਅੰਗ ॥੩੯੫॥

Mukhi Chhabi Parachaanda ॥ Aadaa Abhang ॥ Jutti Joga Jang ॥ Nahee Murata Ang ॥395॥

मुखि छबि प्रचंड ॥ आडां अभंग ॥ जुटि जोग जंग ॥ नही मुरत अंग ॥३९५॥

The beauty of his limbs and face was perfect and powerful; his limbs, practising Yoga, did not bend.395.

177198 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੮


ਅਤਿ ਛਬਿ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ॥ ਨਿਸ ਦਿਨ ਨਿਰਾਸ ॥ ਮੁਨ ਮਨ ਸੁਬਾਸ ॥ ਗੁਨ ਗਨ ਉਦਾਸ ॥੩੯੬॥

At(i) Chhabi Parakaasha ॥ Nisa Dina Niraas ॥ Muna Mana Subaas ॥ Guna Gana Audaas ॥396॥

अति छबि प्रकाश ॥ निस दिन निरास ॥ मुन मन सुबास ॥ गुन गन उदास ॥३९६॥

Through extremely comely, he remained desireless night and day and adopting the qualities, the sage lived detachedly.396.

177209 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੯


ਅਬਯਕਤ ਜੋਗ ॥ ਨਹੀ ਕਉਨ ਸੋਗ ॥ ਨਿਤਪ੍ਰਤਿ ਅਰੋਗ ॥ ਤਜਿ ਰਾਜ ਭੋਗ ॥੩੯੭॥

Abayakata Joga ॥ Nahee Kauna Soga ॥ Nitaparat(i) Aroga ॥ Taji Raaja Bhoga ॥397॥

अबयकत जोग ॥ नही कउन सोग ॥ नितप्रति अरोग ॥ तजि राज भोग ॥३९७॥

Being absorbed in unexpressible Yoga, he was far away from all foundnesses; even on forsaking all the royal luxuries, he always remained healthy.397.

1772110 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧੦


ਮੁਨ ਮਨ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ॥ ਗੁਨ ਗਨ ਦਿਆਲ ॥ ਸੁਭਿ ਮਤਿ ਸੁਢਾਲ ॥ ਦ੍ਰਿੜ ਬ੍ਰਿਤ ਕਰਾਲ ॥੩੯੮॥

Muna Mana Karipaal ॥ Guna Gana Diaal ॥ Subhi Mat(i) Sudhaal ॥ Darirha Barita Karaal ॥398॥

मुन मन क्रिपाल ॥ गुन गन दिआल ॥ सुभि मति सुढाल ॥ द्रिड़ ब्रित कराल ॥३९८॥

That kind sage, was allied with qualities; he was a man of good intellect, a resolute vow-observer and merciful.398.

1772211 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧੧


ਤਨ ਸਹਤ ਸੀਤ ॥ ਨਹੀ ਮੁਰਤ ਚੀਤ ॥ ਬਹੁ ਬਰਖ ਬੀਤ ॥ ਜਨੁ ਜੋਗ ਜੀਤ ॥੩੯੯॥

Tana Sahata Seeta ॥ Nahee Murata Cheeta ॥ Bahu Barakha Beeta ॥ Janu Joga Jeeta ॥399॥

तन सहत सीत ॥ नही मुरत चीत ॥ बहु बरख बीत ॥ जनु जोग जीत ॥३९९॥

Enduring coldness on his body, his mind never got impaired and in this way after many years, he had been victorious in Yogs.399.

1772312 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧੨


ਚਾਲੰਤ ਬਾਤ ॥ ਥਰਕੰਤ ਪਾਤ ॥ ਪੀਅ ਆਤ ਗਾਤ ॥ ਨਹੀ ਬਦਤ ਬਾਤ ॥੪੦੦॥

Chaalanta Baata ॥ Tharakaanta Paata ॥ Peea Aata Gaata ॥ Nahee Badata Baata ॥400॥

चालंत बात ॥ थरकंत पात ॥ पीअ आत गात ॥ नही बदत बात ॥४००॥

When that Yogi talked, the leaves of the trees swerved; and knowing the attributes of the Lord, he did not disclose anything to others.400.

1772413 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧੩


ਭੰਗੰ ਭਛੰਤ ॥ ਕਾਛੀ ਕਛੰਤ ॥ ਕਿੰਗ੍ਰੀ ਬਜੰਤ ॥ ਭਗਵਤ ਅਨੰਤ ॥੪੦੧॥

Bhangn Bhachhaanta ॥ Kaachhee Kachhaanta ॥ Kiangree Bajaanta ॥ Bhagavata Anaanta ॥401॥

भंगं भछंत ॥ काछी कछंत ॥ किंग्री बजंत ॥ भगवत अनंत ॥४०१॥

He used to drink hemp, roamed here and there blew his horn and remained absorbed in the meditation of the Lord.401.

1772514 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੬੬ ਪੰ. ੧੪


       


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