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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਆਗੇ ਚਲਾ ਦੱਤ ਜਟ ਧਾਰੀ ॥ ਬਾਜਤ ਬੇਣ ਬਿਖਾਣ ਅਪਾਰੀ ॥ ਅਸਥਾਵਰ ਲਖਿ ਚੇਤਨ ਭਏ ॥ ਚੇਤਨ ਦੇਖ ਚਕ੍ਰਿਤ ਹ੍ਵੈ ਗਏ ॥੪੩੮॥

Aage Chalaa Datta Jatta Dhaaree ॥ Baajata Bena Bikhaana Apaaree ॥ Asathavara Lakhi Chetana Bhaee ॥ Chetana Dekha Chakarita Havai Gaee ॥438॥

आगे चला दत जट धारी ॥ बाजत बेण बिखाण अपारी ॥ असथावर लखि चेतन भए ॥ चेतन देख चक्रित ह्वै गए ॥४३८॥

Then Dutt, the wearer of matted locks moved further; the musical instruments were being played; seeing Dutt. The inanimate things were becoming animate and the animate were wonder-struck.438.

177681 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧


ਮਹਾ ਰੂਪ ਕਛੁ ਕਹਾ ਨ ਜਾਈ ॥ ਨਿਰਖ ਚਕ੍ਰਿਤ ਰਹੀ ਸਕਲ ਲੁਕਾਈ ॥ ਜਿਤ ਜਿਤ ਜਾਤ ਪਥਹਿ ਰਿਖ ਗਯੋ ॥ ਜਾਨੁਕ ਪ੍ਰੇਮ ਮੇਘ ਬਰਖਯੋ ॥੪੩੯॥

Mahaa Roop Kachhu Kahaa Na Jaaeala ॥ Nirakha Chakarita Rahee Sakala Lukaaeala ॥ Jita Jita Jaata Pathhi Rikha Gayo ॥ Jaanuka Parema Megha Barakhayo ॥439॥

महा रूप कछु कहा न जाई ॥ निरख चक्रित रही सकल लुकाई ॥ जित जित जात पथहि रिख गयो ॥ जानुक प्रेम मेघ बरखयो ॥४३९॥

His great beauty was indescribable, seeing which all the world was in astonishment; the paths on which the sage went, it appeared that the cloud of love was raining.439.

177692 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੨


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPAI

177703 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੩


ਤਹ ਇਕ ਲਖ ਸ਼ਾਹ ਧਨਵਾਨਾ ॥ ਮਹਾ ਰੂਪ ਧਰੇ ਦਿਰਬ ਨਿਧਾਨਾ ॥ ਮਹਾ ਜੋਤਿ ਅਰੁ ਤੇਜ ਅਪਾਰੂ ॥ ਆਪ ਘੜਾ ਜਾਨੁਕ ਮੁਖਿ ਚਾਹੂ ॥੪੪੦॥

Taha Eika Lakha Shaaha Dhanavaanaa ॥ Mahaa Roop Dhare Diraba Nidhaanaa ॥ Mahaa Jot(i) Aru Teja Apaaroo ॥ Aapa Gharhaa Jaanuka Mukhi Chaahoo ॥440॥

तह इक लख शाह धनवाना ॥ महा रूप धरे दिरब निधाना ॥ महा जोति अरु तेज अपारू ॥ आप घड़ा जानुक मुखि चाहू ॥४४०॥

There he saw a wealthy trader, was extremely comely and treasure of money and materials; he was supremely splendid and it appeared that Brahma himself had created him.440.

177714 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੪


ਬਿਕ੍ਰਿਅ ਬੀਚ ਅਧਿਕ ਸਵਧਾਨਾ ॥ ਬਿਨ ਬਿਪਾਰ ਜਿਨ ਅਉਰ ਨ ਜਾਨਾ ॥ਆਸ ਅਨੁਰਕਤ ਤਾਸ ਬ੍ਰਿਤ ਲਾਗਾ ॥ ਮਾਨਹੁ ਮਹਾ ਜੋਗ ਅਨੁਰਾਗਾ ॥੪੪੧॥

Bikaria Beecha Adhika Savadhaanaa ॥ Bina Bipaar Jina Aaura Na Jaanaa ॥aas Anurakata Taas Barita Laaga ॥ Maanahu Mahaa Joga Anuraaga ॥441॥

बिक्रिअ बीच अधिक सवधाना ॥ बिन बिपार जिन अउर न जाना ॥आस अनुरकत तास ब्रित लागा ॥ मानहु महा जोग अनुरागा ॥४४१॥

He was extremely conscious about his sale and it seemed that he did not know anything else except trade; absorbed in desires his attention was solely engrossed in trade and he was looking like a great Yogi.441.

177725 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੫


ਤਹਾ ਰਿਖ ਗਏ ਸੰਗਿ ਸੰਨਯਾਸਨਿ ॥ ਕਈ ਛੋਹਨੀ ਜਾਤ ਨਹੀ ਗਨਿ ॥ਤਾ ਕੇ ਜਾਇ ਦੁਆਰ ਪਰ ਬੈਠੇ ॥ ਸਕਲ ਮੁਨੀ ਮੁਨਰਾਜ ਇਕੈਠੇ ॥੪੪੨॥

Tahaa Rikha Gaee Saangi Saannayaasni ॥ Kaeala Chhohanee Jaata Nahee Gani ॥taa Ke Jaaei Duaar Para Baitthe ॥ Sakala Munee Munaraaja Eikaitthe ॥442॥

तहा रिख गए संगि संनयासनि ॥ कई छोहनी जात नही गनि ॥ता के जाइ दुआर पर बैठे ॥ सकल मुनी मुनराज इकैठे ॥४४२॥

The sage reached there alongwith Sannyasis and innumerable disciples; the great sage Dutt sat at the gate of that trader alongwith many other sages.442.

177736 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੬


ਸ਼ਾਹ ਸੁ ਦਿਰਬ ਬ੍ਰਿਤ ਲਗ ਰਹਾ ॥ ਰਿਖਨ ਓਰ ਤਿਨ ਚਿਤਯੋ ਨ ਕਹਾ ॥ ਨੇਤ੍ਰ ਮੀਚ ਏਕੈ ਧਨਿ ਆਸਾ ॥ ਐਸ ਜਾਨੀਅਤ ਮਹਾ ਉਦਾਸਾ ॥੪੪੩॥

Shaaha Su Diraba Barita Laga Rahaa ॥ Rikhana Aoara Tina Chitayo Na Kahaa ॥ Netara Meecha Eekai Dhani Aasa ॥ Aaisa Jaaneeata Mahaa Audaasa ॥443॥

शाह सु दिरब ब्रित लग रहा ॥ रिखन ओर तिन चितयो न कहा ॥ नेत्र मीच एकै धनि आसा ॥ ऐस जानीअत महा उदासा ॥४४३॥

The mind of the trader was so much absorbed in earning money that he did not pay attention to the sages even slightly; with closed eyes; he was immersed in the expectation of money like a detached hermit.443.

177747 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੭


ਤਹ ਜੇ ਹੁਤੇ ਰਾਵ ਅਰੁ ਰੰਕਾ ॥ ਪੁਨ ਪਗ ਪਰੇ ਛੋਰ ਕੈ ਸ਼ੰਕਾ ॥ ਤਿਹ ਬੈਪਾਰ ਕਰਮ ਕਰ ਭਾਰੀ ॥ ਰਿਖੀਅਨ ਓਰ ਨ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟਿ ਪਸਾਰੀ ॥੪੪੪॥

Taha Je Hute Raav Aru Raankaa ॥ Puna Paga Pare Chhora Kai Shaankaa ॥ Tiha Baipaar Karam Kara Bhaaree ॥ Rikheeana Aoara Na Darishatti Pasaaree ॥444॥

तह जे हुते राव अरु रंका ॥ पुन पग परे छोर कै शंका ॥ तिह बैपार करम कर भारी ॥ रिखीअन ओर न द्रिशटि पसारी ॥४४४॥

All the kings and poor people who were there, leaving all their doubts fell dwon at the feet of the sages, but that trader was so much immersed in his work that he did not even raise his eyes and see towards the sages.444.

177758 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੮


ਤਾਸ ਦੇਖ ਕਰਿ ਦੱਤ ਪ੍ਰਭਾਊ ॥ ਪ੍ਰਗਟ ਕਹਾ ਤਜ ਕੈ ਹਠ ਭਾਊ ॥ ਐਸ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਭ ਸੰਗ ਲਗੱਈਐ ॥ ਤਬ ਹੀ ਪੁਰਖ ਪੁਰਾਤਨ ਪੱਈਐ ॥੪੪੫॥

Taas Dekha Kari Datta Parabhaaoo ॥ Paragatta Kahaa Taja Kai Hattha Bhaaoo ॥ Aaisa Parema Parabha Sang Laga`ealaai ॥ Taba Hee Purakha Puraatana Pa`ealaai ॥445॥

तास देख करि दत प्रभाऊ ॥ प्रगट कहा तज कै हठ भाऊ ॥ ऐस प्रेम प्रभ संग लगईऐ ॥ तब ही पुरख पुरातन पईऐ ॥४४५॥

Dutt looking at his position and impact, leaving his persistence, said openly, “If such a love is employed with the Lord, then that supreme Lord can be realized.”445.

177769 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੯


ਇਤਿ ਸ਼ਾਹ ਬੀਸਵੋ ਗੁਰੂ ਸਮਾਪਤੰ ॥

Eiti Shaaha Beesavo Guroo Samaapataan ॥

इति शाह बीसवो गुरू समापतं ॥

End of the description of the adoption of a Trader as the Twentieth Guru.

1777710 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧੦


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

1777811 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧੧


ਅਥ ਸੁਕ ਪੜਾਵਤ ਨਰ ਇਕੀਸਵੋਂ ਗੁਰੂ ਕਥਨੰ ॥

Ath Suka Parhaavta Nara Eikeesavoaaʼn Guroo Kathnaan ॥

अथ सुक पड़ावत नर इकीसवों गुरू कथनं ॥

Now begins the description of the adoption of a parrot-instructor as the twenty-first Guru

1777912 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧੨


ਚੌਪਈ ॥

Chaupaee ॥

चौपई ॥

CHAUPAI

1778013 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧੩


ਬੀਸ ਗੁਰੂ ਕਰਿ ਆਗੇ ਚਲਾ ॥ ਸੀਖੇ ਸਰਬ ਜੋਗ ਕੀ ਕਲਾ ॥ ਅਤਿ ਪ੍ਰਭਾਵ ਅਮਿਤੋਜੁ ਪ੍ਰਤਾਪੂ ॥ ਜਾਨੁਕ ਸਾਧ ਫਿਰਾ ਸਭ ਜਾਪੂ ॥੪੪੬॥

Beesa Guroo Kari Aage Chalaa ॥ Seekhe Sarab Joga Kee Kalaa ॥ At(i) Parabhaav Amitoju Parataapoo ॥ Jaanuka Saadha Phiraa Sabha Jaapoo ॥446॥

बीस गुरू करि आगे चला ॥ सीखे सरब जोग की कला ॥ अति प्रभाव अमितोजु प्रतापू ॥ जानुक साध फिरा सभ जापू ॥४४६॥

Adopting twenty Gurus and learning all the arts of Yoga, the sage moved further; his glory, impact and radiance were infinite and it seemed that he had completed all the practices and was roaming, remembering the Name of the Lord.446.

1778114 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੨੭੦ ਪੰ. ੧੪


       


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