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Sri Dasam Granth Sahib

       


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ਤੋਮਰ ਛੰਦ ॥

Tomara Chhand ॥

तोमर छंद ॥

TOMAR STANZA

166901 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧


ਇਹ ਭਾਂਤ ਕੈ ਤਿਹ ਨਾਸ ॥ ਕੀਅ ਸੱਤਜੁਗ ਪਰਗਾਸ ॥ ਕਲਜੁੱਗ ਸਰਬ ਬਿਹਾਨ ॥ ਨਿਜ ਜੋਤ ਸਮਾਨ ॥੧॥

Eiha Bhaata Kai Tiha Naas ॥ Keea Sattajuga Paragaas ॥ Kalajugga Sarab Bihaana ॥ Nija Jota Samaana ॥1॥

इह भांत कै तिह नास ॥ कीअ सतजुग परगास ॥ कलजुग सरब बिहान ॥ निज जोत समान ॥१॥

In the way, destroying him, the age of the truth was manifested; the whole of Iron Age had passed away and the light manifested itself everywhere consistently .1

166912 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੨


ਮਹਿਦੀ ਭਰਯੋ ਤਬ ਗਰਬ ॥ ਜਗ ਜੀਤਯੋ ਜਬ ਸਰਬ ॥ ਸਿਰ ਅੱਤ੍ਰ ਪੱਤ੍ਰ ਫਿਰਾਇ ॥ ਜਗ ਜੇਰ ਕੀਨ ਬਨਾਇ ॥੨॥

Mahidee Bharayo Taba Garaba ॥ Jaga Jeetayo Jaba Sarab ॥ Sira Attara Pattara Phiraaei ॥ Jaga Jera Keena Banaaei ॥2॥

महिदी भरयो तब गरब ॥ जग जीतयो जब सरब ॥ सिर अत्र पत्र फिराइ ॥ जग जेर कीन बनाइ ॥२॥

Then Mir Mehdi, conquering the whole world, was filled with pride; he also got the canopy swung over his head and caused the whole world to bow at his feet.2.

166923 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੩


ਬਿਨ ਆਪ ਜਾਨ ਨ ਔਰ ॥ ਸਭ ਰੂਪ ਅਉ ਸਭ ਠਉਰ ॥ ਜਿਨ ਏਕ ਦਿਸ਼ਟ ਨ ਆਨ ॥ ਤਿਸ ਲੀਨ ਕਾਲ ਨਿਦਾਨ ॥੩॥

Bina Aapa Jaana Na Aoura ॥ Sabha Roop Aau Sabha Tthaura ॥ Jina Eeka Dishatta Na Aana ॥ Tisa Leena Kaal Nidaana ॥3॥

बिन आप जान न और ॥ सभ रूप अउ सभ ठउर ॥ जिन एक दिशट न आन ॥ तिस लीन काल निदान ॥३॥

Expect himself, he did not have faith in anyone; he who did not comprehend One Lord-God, he ultimately could not save himself from KAL(death).3.

166934 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੪


ਬਿਨ ਏਕ ਦੂਸਰ ਨਾਹਿ ॥ ਸਭ ਰੰਗ ਰੂਪਨ ਮਾਹਿ ॥ ਜਿਨ ਏਕ ਕੋ ਨ ਪਛਾਨ ॥ ਤਿਹ ਬ੍ਰਿਥਾ ਜਨਮ ਬਿਤਾਰ ॥੪॥

Bina Eeka Doosara Naahi ॥ Sabha Rang Roopna Maahi ॥ Jina Eeka Ko Na Pachhaana ॥ Tiha Barithaa Janama Bitaar ॥4॥

बिन एक दूसर नाहि ॥ सभ रंग रूपन माहि ॥ जिन एक को न पछान ॥ तिह ब्रिथा जनम बितार ॥४॥

There is not one other in all colours and forms except one God; he, who has not recognized that one Lord, he wasted his birth.4.

166945 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੫


ਬਿਨ ਏਕ ਦੂਸਰ ਨ ਔਰ ॥ ਜਲ ਬਾ ਥਲੇ ਸਭ ਠਉਰ ॥ ਜਿਨ ਏਕ ਸੱਤਿ ਨ ਜਾਨ ॥ ਸੋ ਜੂਨ ਜੂਨ ਭ੍ਰਮਾਨ ॥੫॥

Bina Eeka Doosara Na Aoura ॥ Jala Baa Thale Sabha Tthaura ॥ Jina Eeka Satti Na Jaana ॥ So Joona Joona Bharamana ॥5॥

बिन एक दूसर न और ॥ जल बा थले सभ ठउर ॥ जिन एक सति न जान ॥ सो जून जून भ्रमान ॥५॥

Expect that one Lord, there is none other in water, on plain and all the places; he who had not recognized the One Reality, he only roamed away amongst the Yogis.5.

166956 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੬


ਤਜ ਏਕ ਜਾਨਾ ਦੂਜ ॥ ਮਮ ਜਾਨ ਤਾਸ ਨ ਸੂਝ ॥ ਤਿਹ ਦੂਖ ਭੂਖ ਪਿਆਸ ॥ਦਿਨ ਰੈਨ ਸਰਬ ਉਦਾਸ ॥੬॥

Taja Eeka Jaanaa Dooja ॥ Mama Jaana Taas Na Soojha ॥ Tiha Dookha Bhookha Piaas ॥dina Raina Sarab Audaas ॥6॥

तज एक जाना दूज ॥ मम जान तास न सूझ ॥ तिह दूख भूख पिआस ॥दिन रैन सरब उदास ॥६॥

He who leaving the one, believed in another one, in my view, he is devoid of wisdom; he will be surrounded by suffering, hunger, thirst and anxiety throughout day and night.6.

166967 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੭


ਨਹਿ ਚੈਨ ਐਨ ਸੁ ਵਾਹਿ ॥ ਨਿਤ ਰੋਗ ਹੋਵਤ ਤਾਹਿ ॥ ਨਿਤ ਦੂਖ ਭੂਖ ਮਰੰਤ ॥ ਨਹਿ ਚੈਨ ਦਿਉਸ ਬਿਤੰਤ ॥੭॥

Nahi Chaina Aaina Su Vaahi ॥ Nita Roga Hovata Taahi ॥ Nita Dookha Bhookha Maraanta ॥ Nahi Chaina Diausa Bitaanta ॥7॥

नहि चैन ऐन सु वाहि ॥ नित रोग होवत ताहि ॥ नित दूख भूख मरंत ॥ नहि चैन दिउस बितंत ॥७॥

He will never get peace and will always be surrounded by ailments; he will always suffer death on account of suffering and hunger; he will always remain restless.7.

166978 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੮


ਤਨ ਪਾਦ ਕੁਸ਼ਟ ਚਲੰਤ ॥ ਬਪੁ ਗਲਤ ਨਿੱਤ ਗਲੰਤ ॥ ਨਹਿ ਨਿੱਤ ਦੇਹ ਅਰੋਗ ॥ ਨਿਤ ਪੁਤ੍ਰ ਪੌਤ੍ਰਨ ਸੋਗ ॥੮॥

Tana Paada Kushatta Chalaanta ॥ Bapu Galata Nitta Galaanta ॥ Nahi Nitta Deha Aroga ॥ Nita Putara Poutarana Soga ॥8॥

तन पाद कुशट चलंत ॥ बपु गलत नित गलंत ॥ नहि नित देह अरोग ॥ नित पुत्र पौत्रन सोग ॥८॥

The leprosy will prevail in his body and all his body will rot; his body will not remain health and his foundness for sons and grandson will always afflict him.8.

166989 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੯


ਨਿਤ ਨਾਸ ਤਿਹ ਪਰਵਾਰ ॥ ਨਹਿ ਅੰਤ ਦੇਹ ਉਧਾਰ ॥ ਨਿਤ ਰੋਗ ਸੋਗ ਗ੍ਰਸੰਤ ॥ ਮ੍ਰਿਤ ਸ੍ਵਾਨ ਅੰਤ ਮਰੰਤ ॥੯॥

Nita Naas Tiha Paravaar ॥ Nahi Aanta Deha Audhaar ॥ Nita Roga Soga Garasaanta ॥ Marita Savaana Aanta Maraanta ॥9॥

नित नास तिह परवार ॥ नहि अंत देह उधार ॥ नित रोग सोग ग्रसंत ॥ म्रित स्वान अंत मरंत ॥९॥

His family will be destroyed and at the and, his body will not be redeemed also; he will always be engrossed in disease and sorrow; ultimately, he will die the death of a dog .9.

1669910 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧੦


ਤਬ ਜਾਨ ਕਾਲ ਪ੍ਰਬੀਨ ॥ ਤਿਹ ਮਾਰਿਓ ਕਰਿ ਦੀਨ ॥ ਇਕ ਕੀਟ ਦੀਨ ਉਪਾਇ ॥ ਤਿਸ ਕਾਨ ਪੈਠੋ ਜਾਇ ॥੧੦॥

Taba Jaana Kaal Parabeena ॥ Tiha Maariaoa Kari Deena ॥ Eika Keetta Deena Aupaaei ॥ Tisa Kaana Paittho Jaaei ॥10॥

तब जान काल प्रबीन ॥ तिह मारिओ करि दीन ॥ इक कीट दीन उपाइ ॥ तिस कान पैठो जाइ ॥१०॥

Reflecting over the egoistic state of Mir Mehdi the Unmanifested Brahman thought of killing him; he created an insect, which entered the ear of Mir Mehdi.10.

1670011 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧੧


ਧਸਿ ਕੀਟ ਕਾਨਨ ਬੀਚ ॥ ਤਿਸ ਜੀਤਯੋ ਜਿਮ ਨੀਚ ॥ ਬਹੁ ਭਾਂਤ ਦੇ ਦੁਖ ਤਾਹਿ ॥ ਇਹ ਭਾਂਤਿ ਮਾਰਿਓ ਵਾਹਿ ॥੧੧॥

Dhasi Keetta Kaanana Beecha ॥ Tisa Jeetayo Jima Neecha ॥ Bahu Bhaata De Dukha Taahi ॥ Eiha Bhaat(i) Maariaoa Vaahi ॥11॥

धसि कीट कानन बीच ॥ तिस जीतयो जिम नीच ॥ बहु भांत दे दुख ताहि ॥ इह भांति मारिओ वाहि ॥११॥

Entering his ear, that insect conquered that base fellow, and giving him various types of suffering, killed him in this way.11.

1670112 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧੨


ਇਤਿ ਮਹਿਦੀ ਮੀਰ ਬਧਹ ॥

Eiti Mahidee Meera Badhaha ॥

इति महिदी मीर बधह ॥

The Lord is One and He can be realized through the

1670213 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧੩


ਭਾਗ

Bhaag

भाग

SECTION

1670314 ਦਸਮ ਗਰੰਥ ਸਾਹਿਬ : ਪੰਨਾ ੧੧੯੩ ਪੰ. ੧੪


       


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