Sri Nanak Prakash

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परमानद पठा१ तुम पासा
आए बेदी लखहु अवासा२
चौकड़ खरचन कीबिधि जानहु
सुधि करने मम आवन मानहु३ ॥५५॥
सुनि मूला बोलो दिज साथे
भला भयो आवहिण मुझ माथे
तूरन४ जहिण तहिण दास पठाए
लिय मंगवाइ सौज५ समुदाए ॥५६॥
दिज भेजो पुन बोलि पठाए६
मूले सदन सभिहि चलि आए
मिलि कै करी भले कुल रीता
हरखे वधी नवीनी प्रीता ॥५७॥
चौकड़ खरचन जो बिधि चीनी
परमानद सभिहि तब कीनी
राहु लाग७ युग घां ते८ होयो
भई वधाई शोक बिगोयो९ ॥५८॥
करि इकंत कालू कहि बानी
परमानद! सुनो सुख खानी
मूले ते मांगहु तुम साहा
भली भांति जौ होइ बिवाहा ॥५९॥
कीनि प्रिथक१० मूले को तब ही
परमानद कही बिधि सभिही
कंना बर की बय११ है तरुना१


१ने भेजिआ है
२घर
३मेरा आअुणा खबर देण लई समझो
४छेती
५सामान
६(कुड़म) सज़द घले
७लाग दी जो रहुरीती सी
८दोहां तरफोण
९दूर कीता
१०वज़खरा
११अुमर

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